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आमेर दुर्ग का इतिहास 

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आमेर दुर्ग का निर्माण मिर्जा राजा मानसिंह प्रथम द्वारा करवाया गया।

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आमेर दुर्ग को अमरगढ़, अम्बेर के नाम से भी जाना जाता है 

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1707 ई. में बहादुरशाह ने इस दुर्ग पर अधिकार कर इसका नाम मोमीनाबाद रखा।

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इस दुर्ग में शीलामाता मंदिर का निर्माण मिर्जा राजा जयसिंह द्वारा करवाया गया।

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शीलामाता कच्छवाहा शासकों की इष्ट देवी मानी जाती है

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पश्चिम बंगाल के शासक कैडर को पराजित कर जस्सौर नामक स्थान से माता की मूर्ति को लाया गया था 

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मिर्जा राजा मानसिंह की पत्नी कनकावती द्वारा इस दुर्ग में जगत शिरोमणि मंदिर का निर्माण करवाया गया था

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यह मंदिर "मीरा मंदिर" के नाम से भी जाना जाता है 

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इस दुर्ग में स्थित शीश महल का निर्माण मिर्जा राजा जयसिंह प्रथम द्वारा करवाया गया था  

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आमेर दुर्ग के नीचे स्थित मावठा झील के किनारे केसर की खेती की जाती थी।