"स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा।"

- लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक

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23 जुलाई 1856 में रत्नागिरी महाराष्ट्र में लोकमान्य तिलक का जन्म हुआ।

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तिलक ऐसे राष्ट्रवादी नेता थे जिनके जनसामान्य के साथ सम्बन्ध अच्छे थे।

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सर्वप्रथम स्वराज की मांग बाल गंगाधर द्वारा ही की गई थी।

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बाल गंगाधर केसरी नामक अखबार में क्रांतिकारी गतिविधियों के बारें में लिखा करते थे ।

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तिलक के द्वारा लिखे गये लेखों के कारण 1908 में उनके ऊपर राजद्रोह का मुकदमा चलाया गया।

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तिलक को 6 साल की सज़ा सुनाकर बर्मा जेल में भेज दिया गया।

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बर्मा की मांडले जेल में इन्होंने गीता रहस्य नामक पुस्तक लिखी।

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'इंडियन अर्नेस्ट' किताब में बाल गंगाधर तिलक को भारतीय असंतोष की अभिव्यक्ति का जनक कहा था।

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इंडियन अर्नेस्ट के लेखक के खिलाफ तिलक ने लंदन में केस भी किया था।

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1 अगस्त 1920 को लोकमान्य तिलक का निधन हो गया।

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