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किस प्रजाति को बचाने के लिए मनाया जाता है, यह दिन आइये जानते है -
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गौरैया घरों की छतों पर देखा जाने वाला भूरे रंग का पक्षी है जो कहीं न कहीं हमारी कहानी कविताओं का हिस्सा भी रहा है।
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इस पक्षी के पौराणिक महत्व भी है लेकिन गौरैया की आबादी प्रायः लुप्त सी होती जा रही है।
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गौरैया के लुप्त होने का मुख्य कारण है बढ़ता प्रदूषण, शहरीकरण, और तापमान में वृद्धि या ग्लोबल वार्मिंग।
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गौरैया की 26 प्रजातियाँ है जो अफ्रीका, एशिया और यूरोप में पाई जाती है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इनकी संख्या में कमी देखी गई है।
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इसी समस्या को देखते हुए हर साल गौरैया के संरक्षण के लिए 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है।
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इस दिवस को मनाने की शुरुआत 2010 में नेचर फोरेवर सोसाइटी, भारत और इको-सिस एक्शन फाउंडेशन जो की फ़्रांस की संस्था है, के द्वारा की गई।
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गौरैया के संरक्षण में किये गये प्रयासों की सराहना के लिए गुजरात सरकार द्वारा गौरैया पुरस्कार भी दिया जाता है।